हिंदी भाषा
हिन्दुस्तान में हिंदी बोलने वालों की संख्या तो अन्य भारतीय भाषाओं की अपेक्षा अधिक है किन्तु उच्च शिक्षा संस्थानों में हिंदी का अध्ययन करने वाले छात्रों की संख्या अपेक्षा से काफी कम है यही नहीं हिंदी के माध्यम से पढाई पर आज के परिवेश में अंग्रेज़ी के अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं का क्षेत्र अपनी सीमा से बाहर भी पहुंच गया है इसका मूल कारण रोजगार या अन्य कारणों से परिवारों का विभिन्न शहरों में रहना है। देश की विविध बोलियां एक सूत्र से बंधकर पूरे देश में प्रयुक्त हो रही है अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे पहुंचाने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है फिर भी अंग्रेजी के अपेक्षाकृत हिंदी बोलचाल व अध्ययन के क्षेत्र में अपनी मजबूती के साथ नहीं दिख रही है यह आजद भारत के लिए एक चुनौती है विकास की सारी सम्भावनाओं को अंग्रेजी के बल पर समझने की भूल ने हिंदी की घोर उपेक्षा की है हमें ऐसे पाठ्यक्रमों व भाषाई तकनीकी का विकास करने की ओर अग्रसर होना चाहिए जो हिंदी के माध्यम से समस्त अध्ययन व शोध में सफलता मिले यह भाषा के नीति निर्माताओं व हिंदी के मनीषियों के द्वारा ही संभव है
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