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Showing posts from June, 2021

भोजपुरी गीतों में फूहडता

 भोजपुरी गीतों में फूहडता आजकल सोशल मीडिया पर भोजपुरी गीतों में फूहडता पर काफी चर्चा चल रही है।खेसारी लाल के गीतों से नाराजगी जताई जा रही है।तमाम ऐसे गीत शादी ब्याह के मौके पर या गाँव में अनेक आयोजनों में सुनने को मिलते हैं जिनके संगीत का आनंद आज की युवा पीढी मजे लेकर सुनती है।भोजपुरी में अनेक तुक व बातें शामिल की जा रही है जिन्हें कोई भी सभ्य समाज सुनने में अपमानित महसूस करता है। ऐसा नहीं है कि यह कुछ दिनों, महीनों से हो रहा है।कहना आश्चर्य नहीं होगा कि पिछला दशक ही भोजपुरी गीतों में अश्लीलता का दशक रहा है।हालांकि कुछ कम था लेकिन अब बहुतायत हो गई है।उसके शौकीन लोगों ने आनंद लिया।लेकिन जो समाज बुराईयों के विरोध में आगे आता है किन्हीं कारणों से चुप रहा लेकिन अब समाज के जागरूक लोगों ने विरोध का स्वर मुखर किया है।जो भोजपुरी साहित्य के लिए शुभसंकेत है। साहित्य समाज का दर्पण है।साहित्य समाज को जोड़ता है।किसी समाज, स्थान व संस्कृति को आगे तक जीवंत रखती है।भोजपुरी में हमारे संस्कार, श्रृतु, देव गीत, श्रृंगार, विरह,बारहमासा, आदि तमाम विधाओं में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के द्वारा अपने संस...

महामारी ंंऔर पर्यावरण

 संपूर्ण विश्व में सन2020में एक महामारी के रूप में कोरोना वाइरस का संक्रमण तेजी से फैला।हालांकि लोगो का यह भी कहना है कि कुछ देशों को इसके आने की आहट सन2019के अंतिम माह में ही हो गई थी। लेकिन दो हजार बीस मे तेजी से फैला और सभी देशों में लोग प्रभावित हुए।सरकारों ने जनता के जीवन को बंचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया।लाक डाउन व तमाम सुरक्षा के तरीकों को अपनाया गया और इसी बीच मानव जीवन को बँचाने के लिए टीका बनाने की कवायद शुरू की गई।खुशी इस बात की है कि कम समय में टीका तैयार हो गया और लोगों को लग रहा है। प्रकृति से छेड़छाड़ यानी उसके विरुद्ध कार्य करने का दुष्परिणाम मिलता है।लोगों का यह भी आरोप है कि कोरोना मानव निर्मित है जो मानव जीवन के लिए चुनौती बना हुआ है।भारत में दूसरी लहर मे आक्सीजन  की कमी से तमाम लोगों को जीवन से हाथ धोना पड़ा।वनो के विनाश का दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।आक्सीजन प्रदान करने वाले पेड़ो को बेतहाशा काटा गया हालांकि कि इसके खिलाफ कड़ा कानून भी बना है। फिर भी कटाई रूकी नहीं।धरती पर मानव जीवन को सुखी रखने के लिए वनो का क्षेत्रफल बढ़ाना होगा।वरना प्राकृतिक असंतुलन...

आपदा और हमारे सामाजिक कर्तव्य