भोजपुरी गीतों में फूहडता
भोजपुरी गीतों में फूहडता आजकल सोशल मीडिया पर भोजपुरी गीतों में फूहडता पर काफी चर्चा चल रही है।खेसारी लाल के गीतों से नाराजगी जताई जा रही है।तमाम ऐसे गीत शादी ब्याह के मौके पर या गाँव में अनेक आयोजनों में सुनने को मिलते हैं जिनके संगीत का आनंद आज की युवा पीढी मजे लेकर सुनती है।भोजपुरी में अनेक तुक व बातें शामिल की जा रही है जिन्हें कोई भी सभ्य समाज सुनने में अपमानित महसूस करता है। ऐसा नहीं है कि यह कुछ दिनों, महीनों से हो रहा है।कहना आश्चर्य नहीं होगा कि पिछला दशक ही भोजपुरी गीतों में अश्लीलता का दशक रहा है।हालांकि कुछ कम था लेकिन अब बहुतायत हो गई है।उसके शौकीन लोगों ने आनंद लिया।लेकिन जो समाज बुराईयों के विरोध में आगे आता है किन्हीं कारणों से चुप रहा लेकिन अब समाज के जागरूक लोगों ने विरोध का स्वर मुखर किया है।जो भोजपुरी साहित्य के लिए शुभसंकेत है। साहित्य समाज का दर्पण है।साहित्य समाज को जोड़ता है।किसी समाज, स्थान व संस्कृति को आगे तक जीवंत रखती है।भोजपुरी में हमारे संस्कार, श्रृतु, देव गीत, श्रृंगार, विरह,बारहमासा, आदि तमाम विधाओं में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के द्वारा अपने संस...