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       विश्व कविता दिवस पर -   * *पास तेरे ही आऊॅ कविता** मन के भाव सुनाऊॅ कविता  डोर लेख की बाधूॅ कविता।  अनजाने में बहूॅ कहीं भी  पास तेरे ही आऊॅ कविता।।  मन का दर्पण रहे उजाला  घोर कालिमा उड़ उड़ जाए। नि:श्वांसों में श्वाॅस भरूॅ नित  देख सदा मन को नित भाए।।         विहॅस सदा मैं देखूॅ वनिता          पास तेरे ही आऊॅ कविता।। क्या होगा कल आज पढ़ूं मैं  गीत सुनहरे आज गढ़ूॅ मैं। हुए धरा पर मलिन आज जो  ओज निखारूॅ और मढूॅ मैं।।     तेज रश्मि ले बढ़ती सविता       पास तेरे ही आऊॅ कविता।। बाॅध छंद और लय में गाऊॅ मानवता की बात बताऊॅ। रीति प्रीति के जन जन में  रहें सुखी जन, मैं सुख पाऊॅ।।   अनजानी ना रहे ये कविता     पास तेरे ही आऊॅ कविता।। **डॉ मोहन पाण्डेय 'भ्रमर '  

पं दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ

  पं दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान का शुभारंभ  हाटा (कुशीनगर)। भारतीय जनता पार्टी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान–2026 के अंतर्गत हाटा विधानसभा क्षेत्र के हाटा देहात एवं मोतीचक मण्डल का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आज विधिवत शुभारंभ हुआ। मोतीचक मण्डल के प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन हाटा विधायक श्री मोहन वर्मा जी ने किया, जबकि हाटा देहात मण्डल के प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन पूर्व जिला अध्यक्ष श्री जय प्रकाश शाही जी द्वारा किया गया। यह प्रशिक्षण शिविर किसान पीजी कॉलेज, पैकौली (हाटा) परिसर में आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक हाटा मोहन वर्मा ने सरकार की उपलब्धियों को बताया और प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया पूर्व जिलाध्यक्ष जयप्रकाश शाही ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद के विचारों को आत्मसात करते हुए संगठन की मजबूती, कार्यकर्ता निर्माण तथा समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचने के संकल्प को दोहराया। प्रशिक्षण शिविर के दौरान कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार, सुदृढ़ीकरण, बूथ सशक्तिकरण, सेवा कार्य एवं सामाजिक समरसता जैसे महत्...

वसंत गीत

  ऋतुराज  वसंत * आयो ऋतुराज सैन्य फूलों के संग , हिय में हुलास नव -पल्लव डोलत है । शीत के मीत गयो शीत के बिछावन, विहग करत केलि , भ्रमरन खेलत है ।।  सरस बयारि भाव तन मन चंग , मधुप गुंजार  लाल टेसू झूलत है।    देखो रसाल बीच मंजरि के आवन से नेह टपकत रस प्रेम में घुलत है ।। पुहुप की डलियन में प्रणय रंग , मान रखे जग में व्यापत दिखत है। रसहिं तुरन, जोग धावत बेग धरि, तूरत  वसंत  ताहि वाको इहां भंग है ।।  खेतों में शोभें पीत सरसों के अंग ,    शिशिर हेमंत बाद आवत  वसंत  है । धरनी के आंगन में बात जग माने है     कहत कवि जन ऋतुओं का कंत है ।। *मोहन पाण्डेय 'भ्रमर ' हाटा कुशीनगर उत्तर प्रदेश  मोबाईल 9793070189

बनटोलवा में गण्डक नदी पर बनेगा पुल

 हाटा विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र सिकटिया के बनटोलवा टोले के पास छोटी गंडक पर विधायक हाटा मोहन वर्मा के प्रयास से पुल बनाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वीकृति दी है।इस पुल के बनने से लोगों की बरसों की समस्या दूर होगी।अब इस पार के लोग दूसरे तरफ आसानी से जायेंगे और अपने काम सहूलियत से करेंगे।अब जिले पर जाने में भी कम समय लगेगा।इस फैसले से लोगों में काफी उत्साह है। विधायक मोहन वर्मा ने बताया कि मैंने वादा किया था जिसे पूरा किया।

ग्रुप कैप्टन को श्रद्धांजलि

 देवरिया के लाल ग्रुप कैप्टन वरूण सिंह जी का निधन बहुत ही दुखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें

यूपी टेट परीक्षा,,

 यूपी टेट परीक्षा2021,28 नवम्बर रविवार को आयोजित की गई थी सभी परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा की सम्पूर्ण तैयारियां पूरी कर ली गई थ़ी. कक्ष निरीक्षक, केन्द्राध्यक्ष, और अधिकारी गण तैनात ही गए थे।दूर दराज से छात्र केन्द्रों पर पहुँच भी गये थे और  ऐन वक्त पर परीक्षा कैंसिल। पेपर आउट हो गया था।सरकारी एजेंसियों ने समय पर सतर्कता बरती और सरकार ने फैसला ले लिया।चंद स्वार्थी लोगों की करतूतों के कारण जो क्षति हुई उसकी भरपाई असंभव है।फिर भी प्रदेश सरकार ने जो फैसला लिया है धह स्वागत योग्य है।परीक्षा पुनः होगी।तैयारी करनेवाले जरूर सफलता पायेंगे।

गाँधी दर्शन

  गाँधी दर्शन के मानवीय दृष्टिकोण .............................. ...................... आज सम्पूर्ण विश्व में मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें भारत की जनता ने राष्ट्रपिता के नाम से आदर पूर्वक सम्मान दिया आज उनके विचार सम्पूर्ण विश्व में एक आदर्श के रूप में अपनाए जा रहे हैं।विश्व समाज को सत्य, अहिंसा ओऔर प्रेम का जो संदेश उन्होंने दिया वह मानव समाज को युगों युगों तक एक निर्मल विचार प्रदान करता रहेगा।महात्मा गांधी का जन्म गुलामी के दिनों में हुआ।उनकी शिक्षा पूरी से परिवार के संसकारों के अनुसार ही हुई और उन्होंने अपने माता रूपी गुरु की शिक्षा का आजीवन पालन किया।उन्होंने शिक्षा ग्रहण करने के बाद जब अपने आजीविका के लिए दक्षिण अफ्रीका की धरती पर पहुंचे और वहाँ रह रहे भारतीयों यानी गिरमिटिया लोगों के बीच रहकर उनकी गुलामी की पीड़ा को देखा तो उनकी अंतरात्मा झकझोर उठी और विदेशी धरती पर रह रहे भारतीयों की पीड़ा दूर करने का बीड़ा उठा लिया।अपमानित होना पड़ा, कड़ा संघर्ष भी करना पड़ा लेकिन शांति के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने वहाँ भारतीयों के सम्मान को वापस दिलाने में सफलता पायी। एक कहावत है कि,"आये थे ह...