आज देश के अंदर आतंकवाद और सीमा पर स्थित काश्मीर में अपने ही जवानों पर पत्थर बाजीयह देश की सबसे बड़ी समस्या है । लगता है काश्मीर के पत्थरबाज इस देश माटी व लोकतंत्र से कोई मतल...
लो क में किसी भी भाषा के जीवंत रहने व जन जन में उसके प्रति आस्था व लगाव तभी रहता है जब जीवन के हर क्षेत्र में उसका प्रयोग किया जाता है। लोकगायकों ने माटी की संस्कृति को अपने ...
लोकगायन के परम्परा में वर्तमान में बिहार की माटी की बेटी शारदा सिन्हा का नाम प्रमुख पंक्तियों में रखा जाता है। क्योंकि वे केवल भोजपुरी अंचल ही नहीं एक क्षेत्र विशेष की नह...
भोलानाथ गहमरी ने एक बहुत प्रभावशाली निर्गुण लिखा है जिसे आकाशवाणी गोरखपुर ने कई बरसों तक प्रसारित किया। मोहम्मद खलील के द्वारा गाया गया। ईस गीत को अनेक आयोजनों में प्रस...
हिंदी साहित्य में निर्गुण काव्य धारा की पैठ समाज में काफी गहराई तक है। भारत के गांव में सदियों से निर्गुण के प्रति अनुराग रहा है। जब माया के जाल से ऊबा मनुष्य आत्मा और परमात...
एक और कजरी मालिनी अवस्थी की ========≠====+========== रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे मोहे मारे नजरिया सवंरिया रे। पहनी सारी गुलाबी चुनरिया मोहे मारे नजरिया। ===========चौमासे पर भी उन्होंने अच्छी प्रस...
मालिनी अवस्थी ने अपने गायन (कजरी) के माध्यम से बाल विवाह व बाल विवाह करने वालों पर करारा प्रहार कर भोजपुरी की मजबूती को स्पष्ट प्रदर्शित किया है ==सईयां मिले लरिकईयां मैं का ...
मालिनी अवस्थी की एक कजरी जिसमें एक ऐसी विरह पीड़िता नायिका के वेदना का सचित्र चित्रण किया गया है नायक अंग्रेजों की सेना में सिपाही है उसे रंगून जाना पड़ा नायिका अपनी मनोद...
बात कजरी की'तो बता दें कि कजरी उप्र के मिर्जा पुर के इलाके में परम्परागत रूप से गाई जाने वाली विधा है। वैसे पूर्वी यूपी व बिहार में लोग जरूर पसंद करते हैं। सावन कजरी जरुर गात...
भोजपुरी के विकास में लोकगायकों के योगदान पर चर्चा हो और सम्मानित मालिनी अवस्थी जी की चर्चा न हो यह हो ही नहीं सकता। अवस्थी जी उत्तर प्रदेश के कन्नौज में 11 फरवरी 1967को जन्मी और ई...
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पश्चिमी भाग व उत्तर के क्षेत्र में हिंदी की भोजपुरी भाषा प्राचीन काल से ही प्रयोग में रही है। हिंदी साहित्य के उद्भव के बाद भले ही भौगोलिक स...