महामारी ंंऔर पर्यावरण

 संपूर्ण विश्व में सन2020में एक महामारी के रूप में कोरोना वाइरस का

संक्रमण तेजी से फैला।हालांकि लोगो का यह भी कहना है कि कुछ देशों को इसके आने की आहट सन2019के अंतिम माह में ही हो गई थी।

लेकिन दो हजार बीस मे तेजी से फैला और सभी देशों में लोग प्रभावित हुए।सरकारों ने जनता के जीवन को बंचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया।लाक डाउन व तमाम सुरक्षा के तरीकों को अपनाया गया और इसी बीच मानव जीवन को बँचाने के लिए टीका बनाने की कवायद शुरू की गई।खुशी इस बात की है कि कम समय में टीका तैयार हो गया और लोगों को लग रहा है।

प्रकृति से छेड़छाड़ यानी उसके विरुद्ध कार्य करने का दुष्परिणाम मिलता है।लोगों का यह भी आरोप है कि कोरोना मानव निर्मित है जो मानव जीवन के लिए चुनौती बना हुआ है।भारत में दूसरी लहर मे आक्सीजन 

की कमी से तमाम लोगों को जीवन से हाथ धोना पड़ा।वनो के विनाश का दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।आक्सीजन प्रदान करने वाले पेड़ो को बेतहाशा काटा गया हालांकि कि इसके खिलाफ कड़ा कानून भी बना है।

फिर भी कटाई रूकी नहीं।धरती पर मानव जीवन को सुखी रखने के लिए

वनो का क्षेत्रफल बढ़ाना होगा।वरना प्राकृतिक असंतुलन के कारण बाढ़,

सूखा, और तूफान, बदलते मौसम की भयावहता देखने को मिलेगी।


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