भोजपुरी के विकास में लोकगायकों का योगदान
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पश्चिमी भाग व उत्तर के क्षेत्र में हिंदी की भोजपुरी भाषा प्राचीन काल से ही प्रयोग में रही है। हिंदी साहित्य के उद्भव के बाद भले ही भौगोलिक स्थिति के अनुसार थोड़ा बहुत बोलचाल में शाब्दिक रूप से भाषा में अंतर रहा हो लेकिन समझने व आपसी संवाद के लिए कोई कठिनाई नहीं रही। भोजपुरी के जितने भी रुप हैं सबमें एकरूपता है। पश्चिमी चंपारण पूर्वी चंपारण आरा भोजपुर बक्सर से लेकर बनारस आजमगढ़ गाजीपुर गोरखपुर बस्ती आदि मंडलों में भोजपुरी लम्बे समय से बोलचाल की प्रमुख भाषा है। हमारे रीति रिवाज संस्कार ऋतु आदि के भोजपुरी गीतों में हमारे संस्कृति की झलक साफ दिखाई दे ती है। इन्हीं में हम अपने गौरवशाली अतीत की बातें पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढाते रहते हैं। यही हमारी थाती है। अस्सी दशक से भोजपुरी के विकास ने एक नया आयाम जोड़ा भोजपुरी के लोक गायकों ने। त्रिलोकी नाथ उपाध्याय मोती बीए रामानंद गंवांर बिहार के भिखारी ठाकुर जैसे सिद्धहस्त रचनाकारों की रचनाओं ने इस भाषा को समृद्ध किया तो बालेश्वर यादव व मनोज तिवारी जैसे गायकों ने गीत के माध्यम से लोक मंगल की कामना से अनेक नसीहत भी दिया। सैकड़ों भोजपुरी कलाकारों ने इसे समृद्ध करने में अपना योगदान दिया है। मिठास से भरी भोजपुरी भाषा को सांविधानिक रूप से जो स्थान मिलना चाहिए वह नहीं मिला। इसका जिम्मेदार कौन है
इस कड़ी में आगे भी जारी रहेगी चर्चा - - - - - - - -
Mujhe mati ki mahak ka book chahiye
ReplyDeleteRajendra Prasad Chaurasia Urf Balram Vill. Barai Tola P.O. Mansoorganj Khurd (Nahar Chauraha )Pin 273165
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