मालिनी अवस्थी
एक और कजरी मालिनी अवस्थी की
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रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे
मोहे मारे नजरिया सवंरिया रे।
पहनी सारी गुलाबी चुनरिया
मोहे मारे नजरिया।
===========चौमासे पर भी उन्होंने अच्छी प्रस्तुति की है
पहला मास अषाढ बरखा भई है अपार
कईसे जाउं बजरिया मोरे सांवरिया
उन्होंने भोजपुरी की अनेक बोलियों के माध्यम से भोजपुरी के प्रसार में अपना अहम योगदान दिया है और आज भोजपुरी समाज में एक उनकी एक अलग पहचान है
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