भोजपुरी (क्रमशः)

मालिनी अवस्थी की एक कजरी जिसमें एक ऐसी विरह पीड़िता नायिका के वेदना का सचित्र चित्रण किया गया है
नायक अंग्रेजों की सेना में सिपाही है उसे रंगून जाना पड़ा नायिका अपनी मनोदशा ऐसे कहती हैं
=सेजिया पे लोटे कालानाग हो
कचौड़ी गली सून कईल बलमू।
मिर्जापुर कईल गुलजार हो
कचौड़ी गली  सून कईल बलमू।
ऐही मिर्जापुर  से उडलें जहजिया_2
सईयां चलि गईलें रंगून हो_2
पनवां के पात भईलें करधनियां
सेजिया पे लेला जसनूर हो_2
हथवा में होत जो हमरे कटरिया
ते वहा देतीं गोरवन के खून हो_2

अव स्थी के गीत एक तरफ परम्परा का निर्वहन करते दिखते हैं तो दूसरी तरफ आमजन के आंतरिक भाव भी साहसपूवॅक समाज के बीच प्रदर्शित होते हैं


क्रमशः - - - - - - - - - - - —-----

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