सामयिक (देश की एकता अखण्डता की कीमत समझें)

आज देश के अंदर आतंकवाद और सीमा पर स्थित काश्मीर में अपने ही जवानों पर पत्थर बाजीयह देश की सबसे बड़ी समस्या है । लगता है काश्मीर के पत्थरबाज इस देश माटी व लोकतंत्र से कोई मतलब नहीं रखते। हमें देश की अखंडता को कायम रखने के लिए आगे आना चाहिए।
आखिर क्या हो गया है देशवासियों को(खासकर काश्मीरके) कि वे चंद लोगों के भुलावे में आकर देश की सुरक्षा व स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्हें याद रहना चाहिए कि जब मुसीबत आती है तो परिवार व अपना वतन ही काम आते हैं दो गज जमीन भी अपनी धरती मां ही देती है। जननी जन्म भूमिश्च स्वरगादपि गरीयसी - - - - ।कभी भी अपने धरती मां के साथ गद्दारी करने वाले को समाज व इतिहास ने माफ नहीं किया है लोग जो अनजान हैं भारत के इतिहास को पढ ले। जब चालिस करोड़ की जनसंख्या वाले हिंदुस्तान से काश्मीर को छीनने वाले वेआबरु होकर वापस हुए तो आज सवा अरब जनसंख्या व साधन संपन्न हिंदुस्तान की एक इंच जमीन की कल्पना वेवकूफी है। हिंदुस्तान मजबूत है मजबूत रहेगा। अरे, गलती तो देश ने तभी कर दिया जब काश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया। केन्द्र सरकार की रियायत का लाभ उठाकर कुछ लोग देश के साथ नमकहरामी कर रहे हैं। काश्मीर में कमजोर हिंदुओं पर बर्बर अत्याचार हत्या उनके साथ जघन्य अपराध काश्मीर के पंडितों का पलायन यही सब आजादी के बाद देखने को मिला। आखिर कितने दुख की बात है कि देश की  सीमा और देश के जन धन की रक्षा करने वाली सेना के प्रमुख माननीय रावत जी को यह कहते देखा जा रहा है कि हम अपने सेना पर पत्थर और पेट्रोल बम चलता हुआ नहीं देख  सकते (फेसबुक पोस्ट के आधार पर)।
यह काफी दुखद है इस पर पूरे देश को सोचना पड़ेगा।
  
देशविरोधी ताकतें देश की क्षति करने पर तुली हुयी हैं लेकिन देशवासियों की एकता मजबूत केन्द्रीय नेतृत्व और त्वरित ठोस निर्णय लेने की सरकार की क्षमता के आगे मुंह की खानी ही पड़ रही है। ऐसे में अब जनता की जिम्मेदारी है कि एकता अखण्डता का मिसाल कायम रखते हुए देश विरोधी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दे।

*********मोहन पाण्डे
                हाटा कुशीनगर उप्र

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