योग
आज भले ही संपूर्ण विश्व में लोग योग के तरफ आकर्षित हुए हैं और स्वास्थ्य के लिए योग अभ्यास भी कर रहे हैं लेकिन हिंदुस्तान में सदियों से योग साधना होती रही है। मूलतः ऋषि मुनि तक यह योग काफी प्रचलित था और ग्रामीण इलाकों में लोगों को भी योग का ज्ञान रहा लेकिन खेती किसानी के काम और जागरूकता के अभाव में आम आदमी योग से बहुत नहीं जुड़ सका।
बदले परिस्थितियों में योगियों ने जन कल्याण के लिए प्रचार प्रसार करना शुरू किया और इसका फायदा भी बताया सब कुछ भारतीय ग्रन्थों में है उसके आसान व्याख्या को जब संतों ने दिया तो योग का प्रसार बहुत तेजी से होने लगा।मूलतः महर्षि पतंजलि ने योग जो ऋग्वेद में वर्णित है उसे लोक कल्याण के लिए ही सरल रूप में योग सूत्र दिया। योग मूल धारणा है मन की विचलित धारणाओं को एकाग्र करना। जो हृदय व मष्तिष्क में अशुद्ध विचार है उनको दूर कर शरीर को स्वस्थ बनाए रखना। आज विज्ञान भी सहमत है इसके फायदे से। अनेक लाभ है। अगर स्वस्थ रहना है तो योग के तरफ बढना ही होगा। योग को बहुत लोग राजनीति से जोड़कर तमाम आलोचना भी कर रहे हैं यह हकीकत में किसी भी देश के लिए ठीक नहीं है हर वय के लोग हर समाज के लोग योग करे मजबूत हो और देश को मजबूत करें।
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