लोकतंत्र वनाम लोक व तंत्र (सामयिक)

**मोहन पान्डेय
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संपूर्ण विश्व में किसी भी राज व्यवस्था में लोकतंत्र सबसे सफल व्यवस्था मानी गई है। ऐसा तंत्र जिसे लोक यानी जनता ने स्वीकार किया हो और स्थापित किया हो। लोक की हर एक इकाई का तंत्र पर समानरुप से अधिकार हो। इकाई अर्थात प्रत्येक नागरिक। शासन व्यवस्था के सफल संचालन के लिए नागरिकों द्वारा चुनी गई सरकार राज व्यवस्था का संचालन करे। संविधान के प्रति सबकी निष्ठा हो देश की एकता अखण्डता इज्जत व शान सबकी जरूरत हो। यही लोकतंत्र है। भारत ही नहीं विश्व भर के राजनीतिक व सामाजिक चिंतकों ने अपना विचार इससे भिन्न नहीं दिया है। आजादी के बाद संविधान में तंत्र के साथ लोक को भी काफी आजादी व मजबूती प्रदान की गई। जिसकी जरूरत भी थी आजादी के पहले इस लोक ने तमाम जुर्म सहे, अनगिनत बलिदान हुए। वह दर्द इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। आजादी के बाद संविधान ने हमें वहुत शक्ति दिया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उनमें से एक है। आजादी के पहले बोली पर गोरों की गोली चलती थी, तमाम तरह की यातनाएं दी जाती थीं। आजादी के बाद जब लोक का अपना तंत्र (शासन) हुआ तो लोक में बहुत से लोग बेलगाम बोली बोलने लगे किसी की आलोचना किसी पर टिप्पणी कुछ भी कह देना आम हो गया है। और मामला गरम होने पर वही गोरों से विरासत में मिली भाषा का एक ही शब्द सहारा बन जाता है *sorry**क्या यही सर्वोत्तम राजव्यवस्था, *लोकतंत्र श**का आचरण है? दशकों से देश आंतरिक आतंकवाद को झेल रहा है लोकतंत्र की आधारभूत निष्ठा को दरकिनार कर अपने लहू से धरती को लाल कर रहे हैं। केवल तंत्र या केवल लोक, लोकतंत्र की सुरक्षा नहीं कर सकते हैं सभी को लोकतंत्र के प्रति समर्पित होकर कार्य करना पडेगा। हांलाकि जातिवाद क्षेत्रवाद व भाई भतीजावाद ने भी लोकतंत्र को प्रभावित किया है एक मजबूत निष्ठा के बल पर ही देश मजबूत होकर ऊंचाई पर पहुंच सकता है

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