बिहार की उपेक्षा का मतलब क्या है

बिहार की उपेक्षा का मतलब क्या है?
अक्टूबर 2818 में शुरू हो रहे त्यौहार पूरब वालों पर भारी पड़ गए। दशहरा दीपावली छठ जैसे महत्वपूर्ण त्यौहारों के पहले ही गुजरात में घटित घटना ने झकझोर कर रख दिया। एक घटना के कारण गुजरात में अपनी जीविका चला रहे लाखों बाहरी कामगारों के लिए कठिन साबित होने लगा वह भी चंद दिनों में चंद लोगों के कारण। अफरा तफरी मच गई बिहार व यूपी के लोग चाहे जैसे भी हो गुजरात छोड़कर अपने वतन वापस हो रहे हैं। आखिर सभी लोगों का दोष क्या है। दोषी को सजा मिलनी चाहिए एक की करनी और सभी लोगों को प्रताड़ित कर स्टेटवार भेदभाव को बढ़ावा देने का काम संघीय सरकार की मूलभूत अवधारणा के विपरीत नहीं है? यह निंदनीय है और दंडनीय भी क्योंकि राष्ट्रीय विचारधारा के विरूद्ध है। अपने देश में हर नागरिक को कहीं भी रोजगार व नौकरी की छूट है तो बिहार के लोगों के साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों? बिहारी मुफ्त का नहीं लेते। खून पसीने की कमाई खाते हैं और उत्पादन व विकास में योगदान भी देते हैं। क्षेत्र वाद के नाम पर उत्पीड़न व भेदभाव हमारे संविधान की आत्मा के खिलाफ है। हम भारतीय हैं हम एक है
जय हिंद।

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